दिल्ली में SIR के खिलाफ हल्लाबोल, 145 संगठन सड़क पर - CEC के इस्तीफे की मांग
दिल्ली में SIR के खिलाफ आज बड़ा हल्लाबोल हुआ। बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास करीब 200 लोग जमा हुए। 145 संगठनों से बने मंच 'People Against SIR' ने मार्च का आह्वान किया था। प्रकाश राज, परकला प्रभाकर, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, राकेश टिकैत समेत कई चेहरे शामिल हुए। मांग - SIR रद्द हो, CEC का इस्तीफा हो और बैलेट पेपर से चुनाव हो।मार्च को देखते हुए गोल मार्केट से जंतर-मंतर तक 4 घंटे ट्रैफिक रोका गया।

नई दिल्ली: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ दिल्ली में आज का दिन हंगामे भरा रहा। राजधानी के जंतर-मंतर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क पर उतर आया है। गुरुवार दोपहर बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास करीब 200 लोग जमा हुए और चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोला। इस प्रोटेस्ट का आह्वान 145 से ज्यादा संगठनों से बने साझा मंच 'People Against SIR' ने किया था, हालांकि आयोजकों का दावा है कि उनके साथ 200 से 300 संगठन जुड़े हैं। प्रदर्शन की शुरुआत दोपहर 1 बजे बंगला साहिब गुरुद्वारे से होनी थी। योजना थी कि यहां से पैदल मार्च निकालकर जंतर-मंतर और फिर चुनाव आयोग के दफ्तर तक जाया जाएगा।
लेफ्ट संगठनों और नागरिक समूहों के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी थी। बंगला साहिब, गोल डाकखाना और गोल मार्केट के आसपास की सड़कों पर दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया गया। चार घंटे तक मध्य दिल्ली में जाम की स्थिति रही। इस आंदोलन में कई बड़े चेहरे भी शामिल हुए। एक्टर प्रकाश राज, अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, तुषार गांधी, किसान नेता राकेश टिकैत, AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा, SFI की आइशी घोष समेत कई लोग मार्च में पहुंचे। प्रकाश राज ने वीडियो अपील जारी करते हुए कहा था, "हमारे लोकतंत्र, संविधान और वोट देने के अधिकार को बचाने का समय आ गया है, हर गली जंतर-मंतर है।"
प्रदर्शनकारियों की 4 मुख्य मांगें हैं - SIR की प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उन पर कानूनी कार्रवाई हो। वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को वापस जोड़ा जाए। आयोजकों का आरोप है कि SIR के नाम पर 13.41 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिसमें दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाए और इलेक्शन कमिश्नर्स एक्ट 2023 में संशोधन हो। 'People Against SIR' मंच का गठन 14 अक्टूबर को दिल्ली के सूरज भवन में हुई बैठक में किया गया था। इसमें छात्र, किसान, मजदूर, महिला और मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
मंच का नारा है - "हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर"। यह नारा तब दिया गया जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को धरना स्थल के तौर पर डीनोटिफाई कर दिया था। दूसरी तरफ, इस प्रोटेस्ट से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ बड़े चेहरे आज नहीं दिखे। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अपने गृह नगर में हैं, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने आज ही पूछताछ के लिए बुलाया था। दोनों हाल ही में 7 दिन जेल में बिताकर बाहर आए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिल्ली में 273 CAPF कंपनियों की तैनाती को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। इसमें CRPF, RAF, BSF, ITBP और CISF के जवान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि किसी भी फ्लैश प्रोटेस्ट से निपटने के लिए यह जरूरी है। आयोजकों ने कहा है कि अगर उन्हें चुनाव आयोग तक जाने से रोका गया तो वे वहीं पर 'पीपुल्स पार्लियामेंट' लगाएंगे और शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रगान गाकर प्रदर्शन खत्म करेंगे।




