अनंत सिंह की बढ़ी मुश्किलें, JDU ने विधायकी रद्द कराने के लिए स्पीकर को दिया पत्र
JDU से निकाले जाने के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट गहरा गया है। JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र देकर दल-बदल कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग की है। आरोप है कि अनंत सिंह ने MLC चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार किया और CM नीतीश के खिलाफ अपमानजनक भाषा बोली। साथ ही पत्नी नीलम देवी से 20 सूत्री समिति और राज्य मंत्री का दर्जा भी छीन लिया गया है।

बिहार की सियासत में मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से 6 साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधायकी पर भी तलवार लटक गई है।
दरअसल JDU ने सिर्फ पार्टी से निकालकर मामला खत्म नहीं किया है, बल्कि अब उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की पूरी तैयारी कर ली है। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा आज पटना में विधानसभा अध्यक्ष से मिलने पहुंचे थे। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार मौजूद नहीं थे, तो उन्होंने सचिव से मुलाकात कर औपचारिक अनुशंसा पत्र सौंप दिया है।
*क्या आरोप हैं?*
JDU के पत्र में तीन बड़े कारण गिनाए गए हैं -
1. लगातार पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करना
2. शीर्ष नेतृत्व, यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना
3. हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम करना और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में खुलकर प्रचार करना
प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने साफ शब्दों में कहा है, "अनंत सिंह ने हमारी पार्टी के खिलाफ चुनाव प्रचार किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ भी वह लगातार बोलते रहे हैं। उनपर क्विक एक्शन होगा"।
सबूत के तौर पर JDU ने 10 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट, मीडिया बयानों और जनसभाओं के कई वीडियो फुटेज भी स्पीकर को सौंपे हैं। पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची, यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
*पत्नी पर भी एक्शन*
अनंत सिंह के साथ-साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी पर भी चाबुक चला है। सरकार ने तुरंत प्रभाव से उन्हें 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति से हटा दिया है। इस समिति की सदस्य होने के नाते उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, जो अब छिन गया है। साथ ही सरकारी बंगला, सुरक्षा और भत्ते भी वापस ले लिए गए हैं।
*क्या विधायकी चली जाएगी?*
यह सबसे बड़ा सवाल है। कानूनी तौर पर सिर्फ पार्टी से निकाले जाने से विधायकी अपने आप खत्म नहीं होती। लेकिन अगर विधानसभा अध्यक्ष दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य करार देते हैं, तो अनंत सिंह को मोकामा सीट छोड़नी पड़ सकती है। JDU का कहना है कि सचिव ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कार्रवाई जारी है और बहुत जल्द नोटिस जारी होगा।
वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है, "पार्टी हमको निकाल दिया तो निकाल दिया, हम कोई गलत काम नहीं किए।" साथ ही दावा किया कि आगामी चुनाव में JDU सिर्फ 12 सीटों पर सिमट जाएगी।
बता दें कि अनंत सिंह और नीलम देवी दोनों को 24 अक्टूबर को JDU से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था। अब सबकी नजरें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं।




