दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत AAP नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की है। DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान AAP कार्यकर्ता जानबूझकर प्रोटेस्टर्स बनकर गुरुद्वारा बंगला साहिब में घुसे और बैनर-पोस्टर लहराकर पवित्रता भंग की। बाद में भ्रामक वीडियो वायरल किए। पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं मिली। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को गैर-कानूनी बताया और नई दिल्ली में धारा 163 लागू कर दी। DCP सृष्टि पांडे ने कहा कि तैयारी पूरी है और लोगों से अपील है कि गैर-कानूनी प्रोटेस्ट में शामिल न हों। पुलिस का कहना है जंतर-मंतर पर 10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी है और 1000 से ज्यादा भीड़ की इजाजत नहीं है।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर के CJP प्रोटेस्ट से पहले दिल्ली आ रहे 15 कार्यकर्ताओं को इटारसी में ट्रेन से उतार कर डिटेन किया गया। उधर, कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के राजघाट मार्च के कारण गुरुवार को दिल्ली में भारी जाम लगा। मिंटो ब्रिज समेत स्टेशन जाने वाले रास्ते 3 घंटे बंद रहे, जिससे 5000 से ज्यादा यात्री नई दिल्ली स्टेशन नहीं पहुंच पाए और डिब्रूगढ़ राजधानी, मुंबई राजधानी समेत कई ट्रेनें छूट गईं।
दिल्ली के कनॉट प्लेस में बुधवार को इंडिया ब्लॉक की लंच मीटिंग से पहले हंगामा हो गया। मोएट्स रेस्टोरेंट के बाहर PM मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे कश्मीरी युवक फहीम नजीर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पीटा। फहीम का कहना है, वह श्रीनगर का है और मोदी का फैन है, उसने राहुल गांधी को गाली नहीं दी। घटना का वीडियो वायरल है। BJP ने कांग्रेस पर असहिष्णुता का आरोप लगाया है।
दिल्ली में महिलाओं के लिए फ्री बस सफर का नियम बदल गया है। अब पिंक पेपर टिकट बंद हो गया है। CM रेखा गुप्ता सरकार ने 4 अक्टूबर से पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड अनिवार्य कर दिया है। कार्ड को बस में टैप करने पर ही सफर फ्री होगा। कार्ड नहीं होने पर टिकट लेना होगा। NCR की महिलाओं को भी फ्री सुविधा नहीं मिलेगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों से जुड़े हेट स्पीच मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने नेताओं के भड़काऊ भाषणों पर FIR और SIT जांच की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दीं। 5 अक्टूबर को आए इस फैसले से याचिकाकर्ताओं को झटका लगा है। कोर्ट ने कहा अलग FIR का औचित्य नहीं।