मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
विधान परिषद चुनाव ने बिगाड़ा गठबंधन धर्म का गणितRajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बात

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 · रात 8:15 · नई दिल्ली संस्करण

यूपी में बनेगा देश का पहला बासमती व जैविक प्रशिक्षण केंद्र, जमीन लीज को मंजूरी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन50 बार पढ़ा गया
यूपी में बनेगा देश का पहला बासमती व जैविक प्रशिक्षण केंद्र, जमीन लीज को मंजूरी

नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के टांडा बिजैसी में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र (ऑर्गेनिक ट्रेनिंग सेंटर) तथा डेमो फार्म बनाने के लिए करीब 7 एकड़ जमीन 70 साल की लीज पर देने का फैसला किया गया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस केंद्र में ऑडिटोरियम, संग्रहालय और बासमती और जैविक खेती पर गैलरी, कॉन्फ्रेंस रूम, लैब और जैविक खेती के लिए आवश्यक सामान रखने के लिए भंडारण स्थान सहित अन्य सुविधाएं होंगी।

यह केंद्र किसानों को प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही यह कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र बनेगा।

यह देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां पारंपरिक और जैविक दोनों तरह की बासमती खेती का प्रशिक्षण और प्रदर्शन किया जाएगा।

इसकी लोकेशन के कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों को इसका फायदा मिलेगा।

इस केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर बासमती के परीक्षण के लिए 'ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी)' केंद्र भी बनाया गया है, जिससे पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के बासमती क्षेत्र में तीसरा ऐसा केंद्र बन गया है।

इससे नए बासमती बीजों का परीक्षण और क्षेत्र के अनुसार उनकी उपयुक्तता का मूल्यांकन किया जा सकेगा।

इसके अलावा, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारत के पहले एआई-आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट (2026-2028) की शुरुआत की। यह प्रोजेक्ट एपीईडीए और अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ (एआईआरईए) के सहयोग से लागू किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, 1.5 लाख से ज्यादा जगहों से डेटा लिया जाएगा और 5 लाख से ज्यादा किसानों को इसमें शामिल किया जाएगा।

इसका उद्देश्य फसल का सही आकलन, किस्मों की पहचान, वैज्ञानिक सलाह और निर्यात योजना को बेहतर बनाना है।

बासमती चावल, जो भारत का एक जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) उत्पाद है, का निर्यात 2025-26 में 5.67 अरब डॉलर का रहा, जबकि मात्रा लगभग 65 लाख मीट्रिक टन रही।

यह क्षेत्र भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है और मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तर अमेरिका जैसे बाजारों में इसकी मजबूत मांग है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें

ई-पेपर