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शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 · सुबह 10:04 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार सैटेलाइट टाउनशिप विवाद: जमीन की बिक्री पर रोक से भड़कीं रोहिणी आचार्य, सरकार से पूछे तीखे सवाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन20 बार पढ़ा गया
बिहार सैटेलाइट टाउनशिप विवाद: जमीन की बिक्री पर रोक से भड़कीं रोहिणी आचार्य, सरकार से पूछे तीखे सवाल

पटना। बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने पटना समेत 11 शहरों में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने का फैसला लिया है। इसके तहत सरकार ने चिह्नित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री, ट्रांसफर और निर्माण पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि 11 बड़े शहरों में जमीन के लेन-देन पर रोक लगाना चौंकाने वाला और समझ से परे है। रोहिणी आचार्य ने कहा कि बिहार की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस फैसले के पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

रोहिणी आचार्य ने कहा कि जमीन का लेनदेन राज्य में राजस्व का बड़ा स्रोत है और इससे कई लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। यह अव्यावहारिक फैसला राज्य की आर्थिक स्थिति को और खराब कर सकता है। आम लोगों के लिए जमीन की खरीद-बिक्री सामाजिक और आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का जरिया होती है।

साथ ही, यह उनकी आर्थिक सुरक्षा का आधार भी है।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि प्रस्तावित टाउनशिप परियोजनाओं का काम कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंपा जा सकता है। उनके मुताबिक कीमती जमीन को कम कीमत पर देकर बाद में इन टाउनशिप में महंगे दामों पर बेचा जा सकता है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम सुनियोजित शहरी विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए उठाया गया है।

सरकार का उद्देश्य प्रमुख शहरों में बेहतर सुविधाएं और योजनाबद्ध विस्तार सुनिश्चित करना है।

बुधवार को पटना में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार सरकार ने 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें यह अहम फैसला भी शामिल था। इस फैसले के तहत पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में 27 मार्च 2027 तक जमीन से जुड़े सभी लेन-देन और निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी। वहीं मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी में यह रोक 30 जून 2027 तक लागू रहेगी।

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