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रविवार, 25 अक्टूबर 2026 · सुबह 11:17 · नई दिल्ली संस्करण

चंपाई सरकार में बसंत सोरेन बन सकते हैं डिप्टी सीएम, मंत्री की रेस में कौन है आगे ,किनपर मंडरा रहा है खतरा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन6 बार पढ़ा गया

रांची: चंपाई सोरेन सरकार ने सदन में बहुमत साबित कर लिया है । अब सीएम के सामने कैबिनेट विस्तार की चुनौती है। सरकार में शामिल कांग्रेस के कई विधायकों ने तो पहले ही कह दिया है कि इसबार नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। झारखंड में मुख्यमंत्री के अलावा 11 मंत्रियों की जगह है । लेकिन रघुवर सरकार के समय से सीएम समेत 11 मंत्रियों की परिपाटी चली आ रही है। चंपाई सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस विधायक आलमगीर आलम और राजद विधायक सत्यानंद भोक्ता मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। अब कम से कम 8 विधायकों को मंत्री बनाया जाना है। सिर्फ एक विधायक होने की वजह से राजद का मसला सेटल हो चुका है। अब सवाल है कि झामुमो और कांग्रेस से किस किस का पत्ता कट सकता है और किन नये चेहरों को जगह मिल सकती है। हेमंत मंत्रिमंडल में सीएम के अलावा पांच झामुमो विधायक मंत्री थे। इनमें मिथिलेश ठाकुर, चंपाई सोरेन, जोबा मांझी, हफीजुल हसन और जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनकी पत्नी बेबी देवी को मंत्री बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक इस कैबिनेट में हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन को शामिल करना तय है। वह हेमंत सोरेन की जगह डिप्टी सीएम बन सकते हैं। परिवार की एकजुटता बनाए रखने के लिए शिबू सोरेन के ज्येष्ठ पुत्र दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन भी कह चुकी हैं कि गुरुजी ने मंत्री बनने का आशीर्वाद दे दिया है। इनकी इंट्री से महिला कोटे में बेबी देवी का नाम कट सकता है। हालांकि उनके नाम को लेकर पार्टी में दो राय है। एक पक्ष का कहना है कि जगरनाथ महतो के निधन के बाद उनको मंत्री बनाया गया है। इतनी जल्दी उनको हटाने से कार्यकर्ताओं में निगेटिव मैसेज जा सकता है। ऐसे में जोबा मांझी को अलग किया जा सकता है। क्योंकि कोल्हान से आने वाले चंपई सोरेन मंत्री से सीएम बन चुके हैं। अल्पसंख्यक कोटा की वजह से हफीजुअल हसन की दावेदारी मजबूत है। वहीं अगड़ी जाति से आने वाले मिथिलेश ठाकुर को हेमंत सोरेन का बेहद करीबी बताया जाता है। ओबीसी कोटे के दिग्गज झामुमो नेता मथुरा महतो के बारे में जानकारी मिल रही है कि पार्टी उन्हें गिरिडीह से लोकसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रही है। चंपाई कैबिनेट में कांग्रेस कोटे से चार मंत्रियों को शामिल करना है। आलमगीर आलम पहले ही शपथ ले चुके हैं। चर्चा है कि डॉ रामेश्वर उरांव, बादल पत्रलेख और बन्ना गुप्ता की जगह नये चेहरों को जगह देने का दबाव बनाया जा रहा है। पिछले दिनों राजभवन से आमंत्रण मिलने में देरी होने पर सभी विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट कर दिया गया था। पार्टी सूत्रों ने बताया कि उस वक्त प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने विक्षुब्ध विधायकों को भरोसा दिलाया था कि इस बार नये चेहरों को जगह मिलेगी। वहीं पूर्व मंत्रियों के खेमे के सूत्र बता रहे हैं कि प्रभारी ने उन्हें भी भरोसा दिलाया था कि चेहरे नहीं बदले जाएंगे। क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि ऐसा करने पर दूसरे विधायक नाराज हो सकते हैं।

लेकिन विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि बादल पत्रलेख की छुट्टी होनी तय है। उनकी जगह महगामा से कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह को जगह मिल सकती है। अब रही बात बन्ना गुप्ता की तो ओबीसी कैटेगरी को बैलेंस करने के लिए पार्टी के पास अंबा प्रसाद एक विकल्प दिखती हैं। लेकिन वह पहली बार चुनाव जीती हैं। ऊपर से बन्ना गुप्ता अपनी फिल्डिंग सेट करने में लगे हुए हैं। वहीं बन्ना की जगह लेने के लिए उमाशंकर अकेला भी जोर लगा रहे हैं। रही बात डॉ रामेश्वर उरांव की तो बजट सत्र के मद्देनजर उनको हटाना मुश्किल दिख रहा है। वह अर्थशास्त्र के अच्छे जानकार हैं।

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