महंगाई ने बिगाड़ा खेल, RBI ने ब्याज दरें बढ़ाईं, अब लोन लेना पड़ेगा महंगा
महंगाई बढ़ने से RBI ने 4 साल बाद रेपो रेट 25 bps बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। MPC ने रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' किया है, मतलब निकट भविष्य में कटौती नहीं होगी। RBI के अनुसार कच्चा तेल महंगा, कमजोर मानसून और रुपये की गिरावट से CPI 2026-27 में 5.2% रह सकती है और Q3 में 6% के करीब पहुंच सकती है। मिनट्स में संकेत है कि कोर महंगाई बढ़ी तो दिसंबर में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे होम-कर्ज महंगा होगा।

महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ने लगा है और इसी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त रुख अपना लिया है। करीब चार साल बाद केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। साथ ही मौद्रिक नीति के रुख को भी 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है, जिसका सीधा मतलब है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद खत्म। RBI ने यह फैसला 5 से 7 अक्टूबर को हुई 63वीं MPC बैठक में लिया था, जिसके मिनट्स 21 अक्टूबर को जारी किए गए हैं। मिनट्स से साफ संकेत मिलता है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ एक बार की नहीं है, बल्कि आगे भी दरें बढ़ सकती हैं।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक महंगाई अब उतनी नरम नहीं रही जितनी पिछले साल थी। इसके कई कारण हैं - कच्चे तेल के दामों में तेजी, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सप्लाई चेन में दिक्कत, कमजोर मानसून और खाद्य आपूर्ति में मौसम से जुड़ी बाधाएं, रुपये में कमजोरी। अगस्त में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 4.8% हो गई थी, जो जुलाई में 4.5% थी। RBI का अनुमान है कि 2026-27 में महंगाई औसतन 5.2% रहेगी, जो पहले के 5% के अनुमान से ज्यादा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में महंगाई 6% के ऊपरी टॉलरेंस लेवल को छू सकती है। RBI का टॉलरेंस बैंड 2% से 6% है। गवर्नर ने कहा, "महंगाई का दबाव बन रहा है। हेडलाइन CPI तीसरी तिमाही में ऊपरी सीमा को छुएगी और अगले दो क्वार्टर तक 5% से काफी ऊपर बनी रहेगी।"
ब्याज दर बढ़ाने पर सभी 6 सदस्यों में सहमति थी, लेकिन रुख बदलने पर मतभेद दिखा। 4 सदस्य कैलिब्रेटेड टाइटनिंग के पक्ष में थे, जबकि 2 बाहरी सदस्य डॉ. नागेश कुमार और प्रो. राम सिंह न्यूट्रल रुख बनाए रखने के पक्ष में थे। उनका तर्क था कि महंगाई मुख्य रूप से सप्लाई साइड से है, डिमांड से अर्थव्यवस्था ओवरहीट नहीं हो रही। डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने सबसे सख्त संकेत दिए। उन्होंने कहा, "किसी बिंदु पर इनपुट कॉस्ट का बड़ा हिस्सा आउटपुट प्राइस में दिख सकता है। ऐसे में महंगाई को काबू में रखने और उम्मीदों को स्थिर रखने के लिए पॉलिसी रेट में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।" रेपो रेट बढ़ने से SDF रेट 5.25% और MSF रेट 5.75% हो गया है। इसका सीधा असर आपके लोन पर पड़ेगा।
होम लोन, कार लोन, MSME लोन जो EBLR से जुड़े हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। बैंकों में डिपॉजिट रेट भी धीरे-धीरे बढ़ेंगे। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जो पहले 6.7% था, यानी ग्रोथ मजबूत है इसलिए RBI को महंगाई रोकने के लिए सख्ती करने की गुंजाइश है। अगली MPC बैठक 2 से 4 दिसंबर को होगी। तब तक क्रूड, खाद्य कीमतें और कोर इन्फ्लेशन तय करेगा कि दिसंबर में फिर 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी या फिलहाल विराम लगेगा। फिलहाल एक बात तय है - सस्ते कर्ज का दौर खत्म हो गया है।




