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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · सुबह 11:09 · नई दिल्ली संस्करण

बढ़ते बिजली बिल के विरोध में एनएसयूआई का धमतरी के पावर हाउस घेराव, मुख्यमंत्री का पुतला जलाया

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बढ़ते बिजली बिल के विरोध में एनएसयूआई का धमतरी के पावर हाउस घेराव, मुख्यमंत्री का पुतला जलाया

धमतरी। छत्तीसगढ़ में बढ़ती बिजली दरों और बढ़े हुए बिजली बिलों के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) धमतरी इकाई ने आज गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए धमतरी स्थित पावर हाउस (विद्युत विभाग) का घेराव कर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पुतला दहन किया।

प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन लालवानी, शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गौतम वाधवानी, जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र सोनवानी सहित बड़ी संख्या में एनएसयूआई कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद बिजली दरों में औसतन 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है, जिससे आम उपभोक्ता, किसान और छोटे व्यापारी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।

उनका कहना था कि कई परिवारों के बिजली बिल दोगुने से अधिक आ रहे हैं, जबकि बिजली आपूर्ति की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों को सिंचाई के लिए महंगे बिजली बिल चुकाने पड़ रहे हैं और छोटे उद्योग-धंधे संकट का सामना कर रहे हैं।

इस अवसर पर एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राजा देवांगन ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में बिजली अपेक्षाकृत सस्ती और भरोसेमंद थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने बिजली को आम जनता की पहुंच से दूर कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिजली बिलों में राहत नहीं दी गई, किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई और बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो एनएसयूआई प्रदेशभर में उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बिजली दरों में कटौती, नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा किसानों और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की। शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इस प्रदर्शन में पारसमणि साहू, जय श्रीवास्तव, गौरव दास, विनय गंगबेर, तेज प्रकाश साहू, यश चंद्राकर, जगेंद्र साहू, संजू साहू, रोशन वंदे, उमेश साहू सहित दर्जनों एनएसयूआई कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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