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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · सुबह 11:12 · नई दिल्ली संस्करण

दिलीप घोष का TMC पर तंज, बोले- ब्रिगेड भरकर दिखाइए

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिलीप घोष का TMC पर तंज, बोले- ब्रिगेड भरकर दिखाइए

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई के शहीद दिवस को लेकर तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच राज्य के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने कालीघाट तृणमूल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास कार्यकर्ताओं का समर्थन है तो ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सभा कर मैदान भरकर दिखाएं, अन्यथा घर पर शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम करें।

बुधवार सुबह इको पार्क में कार्यकर्ताओं के साथ 'मूड़ी पार्टी' के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा, "अगर हिम्मत है तो ब्रिगेड जाइए। अगर कार्यकर्ता हैं तो ब्रिगेड भरकर दिखाइए। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो घर पर शहीदों के चित्र पर माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि दें।"

21 जुलाई तृणमूल कांग्रेस के लिए वर्षों से सबसे बड़ा राजनीतिक आयोजन रहा है। यह दिन 1993 में ममता बनर्जी की अगुवाई में हुए तत्कालीन युवा कांग्रेस के महाकरण अभियान के दौरान पुलिस गोलीबारी में 13 लोगों की मौत की स्मृति में मनाया जाता है। वर्ष 2025 तक हर साल धर्मतला में इस अवसर पर विशाल सभा आयोजित होती रही।

हालांकि इस बार तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद स्थिति बदल गई है। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाला गुट स्वयं को "असली तृणमूल" बताते हुए 21 जुलाई के आयोजन पर अपना अधिकार जता रहा है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला कालीघाट गुट भी अलग कार्यक्रम की तैयारी में है।

दोनों गुटों ने धर्मतला में सभा की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने वहां आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत गुट को मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के पास कार्यक्रम की अनुमति मिल गई। वहीं कालीघाट गुट को पुलिस ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सभा आयोजित करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उसने इसे स्वीकार नहीं किया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि पार्टी में टूट के बाद ब्रिगेड मैदान भरने को लेकर अनिश्चितता इसकी प्रमुख वजह हो सकती है।

इस मुद्दे पर दिलीप घोष ने कालीघाट गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि संगठन और कार्यकर्ताओं पर भरोसा है तो ब्रिगेड में शक्ति प्रदर्शन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बड़ा आयोजन संभव नहीं है तो घर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देना भी सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि यदि उपयुक्त स्थान नहीं मिला तो वह जरूरत पड़ने पर रिक्शा पर सवार होकर भी 21 जुलाई का कार्यक्रम करेंगी।

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